रायपुर, 11 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के वे अंदरूनी इलाके, जो दशकों तक नक्सल प्रभाव के कारण विकास से वंचित रहे, अब तेजी से बदलाव की राह पर आगे बढ़ रहे हैं। नियद नेल्लानार योजना और मनरेगा के समन्वित प्रयासों ने 224 गांवों की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। इन गांवों में अब रोजगार, आवास, पेयजल, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित हो रही है, जिससे ग्रामीणों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिख रहा है।
जिले में 42 सुरक्षा कैंपों के माध्यम से 67 ग्राम पंचायतों को इस योजना से जोड़ा गया है। मनरेगा के जरिए 16,671 जॉब कार्ड बनाए गए हैं, जिनमें 7,271 नए पंजीयन शामिल हैं। खास बात यह है कि आत्मसमर्पित नक्सलियों और प्रभावित परिवारों को भी रोजगार से जोड़ा गया है, जिससे वे मुख्यधारा में लौट रहे हैं।
अब तक 1,744 विकास कार्यों के जरिए 5 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित किए गए हैं। इससे ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला है और पलायन में कमी आई है। आजीविका को बढ़ावा देने के लिए 372 डबरी (छोटे जलाशय) स्वीकृत किए गए हैं, जिनसे मछली पालन और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा मिल रहा है।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत 2,977 परिवारों को पक्के घर स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से 690 मकान पूर्ण हो चुके हैं। इससे ग्रामीणों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिल रहा है।
गांवों में अब कुएं, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, सड़क, बिजली और मोबाइल टॉवर जैसी सुविधाएं भी पहुंच रही हैं। बांगोली जैसे गांवों में, जहां पहले 18 किलोमीटर दूर राशन लेना पड़ता था, अब यह सुविधा गांव में ही उपलब्ध है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना ही सरकार का लक्ष्य है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन योजनाओं से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति, विश्वास और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा।
- चोट से जूझती रहीं, लेकिन हारी नहीं: झारखंड की पूनम ने जीता केआईटीजी गोल्ड, 9 साल का सूखा खत्म
- अबूझमाड़ से उभरी फुटबॉल प्रतिभाएं: रामकृष्ण मिशन आश्रम बना खेलों का नया केंद्र
- मातृत्व वंदना योजना में छत्तीसगढ़ नंबर-1, तेज मंजूरी और शिकायत निपटान से हासिल की बड़ी सफलता
- What to wear to return to the office? Retailers have no idea for you
