रायपुर, 7 मार्च 2026। मेहनत, दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से अभावों को अवसर में बदला जा सकता है। इसका प्रेरणादायी उदाहरण सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत मेंड्राकला की रहने वाली श्रीमती हरमानिया देवी राजवाड़े हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘बिहान’ से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल कायम की है। कभी बच्चों की स्कूल फीस भरने के लिए संघर्ष करने वाली हरमानिया देवी आज सफल उद्यमी बन चुकी हैं और अपने बच्चों को बड़े शहर में उच्च शिक्षा दिला रही हैं।
हरमानिया देवी बताती हैं कि बिहान योजना से जुड़ने से पहले उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। परिवार का खर्च चलाना भी मुश्किल था, लेकिन आकांक्षा स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और समूह की अध्यक्ष बनने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।
उन्होंने समूह के माध्यम से पहला ऋण लेकर गांव में छोटी सी किराना और श्रृंगार की दुकान शुरू की। मेहनत और लगन से उनका व्यवसाय धीरे-धीरे सफल होने लगा। व्यवसाय बढ़ने के साथ उन्होंने समय पर ऋण चुकता किया और फिर दूसरा ऋण लेकर कपड़ों का व्यवसाय भी शुरू कर दिया। आज उनका कारोबार अच्छा चल रहा है और आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
हरमानिया देवी का कहना है कि बिहान योजना ने उन्हें आत्मविश्वास दिया और यह सिखाया कि छोटे-छोटे कदमों से भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।
आर्थिक स्थिति मजबूत होने का सबसे बड़ा फायदा उनके बच्चों की शिक्षा पर पड़ा है। हरमानिया देवी गर्व के साथ बताती हैं कि पहले वे बच्चों को सामान्य शिक्षा भी मुश्किल से दिला पाती थीं, लेकिन अब उनके बच्चे बिलासपुर जैसे बड़े शहर में रहकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और वह समय पर उनकी फीस भी जमा कर पा रही हैं।
उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। आज हरमानिया देवी जैसी हजारों महिलाएं बिहान योजना के माध्यम से आत्मनिर्भर बनकर ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

