मणिपुरी भाषा की डेब्यू फीचर फिल्म ‘बूंग’ ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराते हुए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस वर्ष आयोजित प्रतिष्ठित BAFTA Awards (ब्रिटिश फिल्म एवं टेलीविजन कला अकादमी पुरस्कार) में ‘बूंग’ ने बाल एवं पारिवारिक फिल्म श्रेणी में जीत दर्ज की। इसके साथ ही यह इस श्रेणी में पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म बन गई है।
लंदन के रॉयल फेस्टिवल हॉल में आयोजित भव्य समारोह में फिल्म की पूरी टीम मौजूद रही। पुरस्कार की घोषणा होते ही हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और भारतीय सिनेमा के लिए यह गर्व का क्षण बन गया। ‘बूंग’ इस समारोह में नामांकित इकलौती भारतीय फिल्म थी, जिसने ‘जूटोपिया 2’, ‘लीलो एंड स्टिच’ और ‘आर्को’ जैसी चर्चित अंतरराष्ट्रीय फिल्मों को पीछे छोड़ते हुए यह सम्मान अपने नाम किया।
फिल्म का निर्देशन लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है, जिनकी यह पहली फीचर फिल्म है। उन्होंने मणिपुर की संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और बाल संवेदनाओं को बेहद सादगी और संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा है। फिल्म के निर्माता फरहान अख्तर, रितेश सिधवानी, विकेश भुटानी, एलन मैकएलेक्स और शुजात सौदागर हैं, जिनके सहयोग से यह क्षेत्रीय फिल्म वैश्विक पहचान तक पहुंच सकी।
‘बूंग’ की कहानी बच्चों और परिवार के रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसमें स्थानीय परिवेश और भावनात्मक गहराई का प्रभावशाली चित्रण किया गया है। समीक्षकों ने इसकी कहानी, निर्देशन और अभिनय की जमकर सराहना की है।
इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल मणिपुरी सिनेमा को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई है, बल्कि भारतीय क्षेत्रीय फिल्मों की ताकत और संभावनाओं को भी दुनिया के सामने रखा है। ‘बूंग’ की सफलता आने वाले फिल्मकारों के लिए प्रेरणा बनकर उभरी है।
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