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तमिलनाडु चुनाव: स्टालिन की वापसी के संकेत, BJP के लिए खाता खोलना भी चुनौतीपूर्ण

चुनावी आकलनों और राजनीतिक विश्लेषणों के मुताबिक, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK को एक बार फिर बढ़त मिलती दिख रही है।

by Nishanebaaj
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चेन्नई। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है। राज्य की 234 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है, और सरकार बनाने के लिए 118 सीटों का आंकड़ा जरूरी है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के बीच माना जा रहा है।

चुनावी आकलनों और राजनीतिक विश्लेषणों के मुताबिक, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK को एक बार फिर बढ़त मिलती दिख रही है। अनुमान है कि DMK गठबंधन 120 से 140 सीटों के बीच हासिल कर सकता है, जिससे स्टालिन की सत्ता में वापसी के आसार मजबूत नजर आ रहे हैं। उनके ‘द्रविड़ियन मॉडल’ और सामाजिक कल्याण योजनाओं को जनता का समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।

वहीं, AIADMK जयललिता की विरासत और पारंपरिक वोट बैंक के सहारे मैदान में है। पार्टी BJP के साथ मिलकर चुनावी रणनीति बना रही है, लेकिन राज्य में BJP की स्थिति अब भी कमजोर मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP के लिए इस बार भी खाता खोलना आसान नहीं होगा, क्योंकि तमिलनाडु में उसकी जमीनी पकड़ सीमित है।

इस चुनाव में अभिनेता थलापति विजय की एंट्री ने भी दिलचस्पी बढ़ा दी है। उनकी पार्टी को 5 से 15 सीटें मिलने का अनुमान लगाया जा रहा है, जो भविष्य की राजनीति में उनकी भूमिका को मजबूत कर सकता है।

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तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से द्रविड़ पार्टियों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जहां क्षेत्रीय मुद्दे, भाषा और सामाजिक न्याय अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में राष्ट्रीय दलों के लिए यहां अपनी पकड़ मजबूत करना अब भी चुनौती बना हुआ है।

अब सबकी नजर 23 अप्रैल को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजों पर टिकी है, जो राज्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे।

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