रायपुर, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में अरुणाचल प्रदेश की 21 वर्षीय वेटलिफ्टर अनाई वांगसु ने संघर्ष और हौसले की मिसाल पेश करते हुए महिलाओं के 58 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर यादगार सफलता हासिल की। खास बात यह है कि रायपुर रवाना होने से कुछ दिन पहले ही वह गंभीर गैस्ट्रिक समस्या के चलते अस्पताल में भर्ती थीं।
अनाई पिछले कई वर्षों से इस बीमारी से जूझ रही हैं, जो अचानक उन्हें कमजोर और डिहाइड्रेट कर देती है। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अस्पताल से छुट्टी मिलने के अगले ही दिन फिर से अभ्यास शुरू कर दिया। इस बार उनका लक्ष्य स्पष्ट था—हर हाल में स्वर्ण पदक जीतना।
स्वर्ण जीतने के बाद अनाई ने कहा कि पहले वे कई प्रतियोगिताओं में कांस्य और रजत पदक जीत चुकी थीं, लेकिन स्वर्ण उनसे हमेशा दूर रहा। परिवार के लोग भी उनसे पूछते थे कि वह गोल्ड कब जीतेंगी। अब इस उपलब्धि से परिवार बेहद खुश है।
अनाई ने इससे पहले यूथ नेशनल्स में दो कांस्य पदक और विभिन्न खेलो इंडिया प्रतियोगिताओं में रजत पदक हासिल किए थे। 2025 के खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी उन्होंने रजत जीता था। हालांकि, पिछले साल ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी नेशनल्स में वे मात्र एक लिफ्ट से स्वर्ण चूक गई थीं, जो उनके लिए बेहद भावुक क्षण था।
वांगचो जनजाति से आने वाली अनाई की खेल यात्रा उनके बड़े भाई सिंचाड बांसु से प्रेरित है, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के वेटलिफ्टर रह चुके हैं। उन्हीं के मार्गदर्शन में अनाई ने इस खेल में कदम रखा, जबकि शुरुआत में वे बॉक्सिंग में करियर बनाना चाहती थीं।
कई कठिनाइयों के बावजूद अनाई ने हार नहीं मानी और अब उनका सपना भारत का प्रतिनिधित्व करना है। यह स्वर्ण पदक उनके आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देता है और यह साबित करता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से हर बाधा को पार किया जा सकता है।
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